अब तक की सबसे कम उम्र की प्रथम नागरिक, स्वतंत्र भारत में पैदा हुईं पहली महामहिम, देश की 15वीं महामहिम राष्ट्रपति बनीं द्रौपदी मुर्मू

नई दिल्ली 25 जुलाई 2022 (नवीन चन्द्र पोखरियाल, सचित गौतम)

देश के 15वें राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू ने आज (25 जुलाई 2022) सर्वोच्च पद की शपथ ग्रहण की। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना द्वारा मुर्मू को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में यह शपथ ग्रहण करवाई गई। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उनके परिजन भी दिल्ली आए। द्रौपदी देश की पहली जनजाति और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं। वह अब तक की सबसे कम उम्र की प्रथम नागरिक बनी हैं।

कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति वैंकया नायडू, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, कई प्रदेशों के राज्यपाल, कई मुख्यमंत्री, तीनों सेनाओं के प्रमुख और कई देशों के राजदूत मौजूद रहे। 21 तोपों की सलामी के बाद राष्ट्रपति मुर्मू ने देश को पहली बार संबोधित किया। उन्होंने ‘जोहार! नमस्कार!’ के साथ संबोधन आरंभ किया। उन्होंने कहा कि वह देश की पहली ऐसी राष्ट्रपति हैं जिन्होंने आजाद भारत में जन्म लिया। इसके बाद वह राष्ट्रपति भवन के रवाना हुईं। वहाँ उन्हें एक इंटर सर्विस गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

आपको बता दें कि शपथ ग्रहण करने के लिए संसद भवन पहुँचने से पहले द्रौपदी मुर्मू आज राजघाट गई थीं। वहाँ उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राष्ट्रपति भवन के लिए रवाना हुईं। वहाँ उनका स्वागत निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और उनकी पत्नी ने गुलदस्ता देकर किया।

गौरतलब है कि निवर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का कार्यकाल 24 जुलाई 2022 को समाप्त हो गया है। उन्होंने कल रात आखिरी बार बतौर राष्ट्रपति देश को संबोधित किया था। उन्होंने संबोधन में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था का आभार प्रकट करते हुए बताया था कि इन पाँच सालों में उनके सबसे यादगार पल वे थे जब वो राष्ट्रपति बन अपने गाँव गए और बुजुर्ग शिक्षकों के पाँव छुए।

लोकतंत्र की ये शक्ति है कि मुझे यहां तक पहुंचाया

द्रौपदी मुर्मू ने संसद भवन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद कहा, मैं देश की पहली ऐसी राष्ट्रपति हूं, जिसका जन्म स्वतंत्र भारत में हुआ था। स्वतंत्र भारत के नागरिकों के साथ हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए हमें अपने प्रयासों में तेजी लानी होगी। द्रोपदी मुर्मू ने कहा, मेरा जन्म ओडिशा के एक आदिवासी गांव में हुआ। लेकिन देश के लोकतंत्र की यह शक्ति है कि मुझे यहां तक पहुंचाया।

द्रोपदी मुर्मू ने कहा, मुझे राष्ट्रपति के रूप में देश ने एक ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में चुना है जब हम अपनी आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। आज से कुछ दिन बाद ही देश अपनी स्वाधीनता के 75 वर्ष पूरे करेगा। ये भी एक संयोग है कि जब देश अपनी आजादी के 50वें वर्ष का पर्व मना रहा था तभी मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी और आज आजादी के 75वें वर्ष में मुझे ये नया दायित्व मिला है।

‘मैं कॉलेज जाने वाली गांव की पहली लड़की थी’

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, मैंने अपनी जीवन यात्रा ओडिशा के एक छोटे से आदिवासी गांव से शुरू की थी। मैं जिस पृष्ठभूमि से आती हूं, वहां मेरे लिये प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करना भी एक सपने जैसा ही था। लेकिन अनेक बाधाओं के बावजूद मेरा संकल्प दृढ़ रहा और मैं कॉलेज जाने वाली अपने गांव की पहली बेटी बनी। ये हमारे लोकतंत्र की ही शक्ति है कि उसमें एक गरीब घर में पैदा हुई बेटी, दूर-सुदूर आदिवासी क्षेत्र में पैदा हुई बेटी, भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच सकती है।

‘राष्ट्रपति बनना मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं’

महामहिम द्रौपदी मुर्मू ने कहा, राष्ट्रपति के पद तक पहुंचना, मेरी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, ये भारत के प्रत्येक गरीब की उपलब्धि है। मेरा निर्वाचन इस बात का सबूत है कि भारत में गरीब सपने देख भी सकता है और उन्हें पूरा भी कर सकता है।

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