बजट 2022: गरीबों और किसानों के लिये बड़े ऐलान संभव, बढ़ सकता है मौजूदा योजनाओं का दायरा

इस साल का बजट गरीबों और किसानों के लिये नये तोहफे ला सकता है. दरअसल कोविड महामारी से समाज के सबसे निचले वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा था वहीं सरकार किसानों के बीच अपनी पकड़ वापस पाने के लिये बजट का सहारा ले सकती है.
वहीं माना जा रहा है कि बजट के बाद 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं ऐसे में सरकार बजट के सहारे लोगों के बीच एक सकारात्मक संकेत देने की कोशिश भी करेगी.
क्या मिल सकता है तोहफा
की खबर के अनुसार सरकार बजट में प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना का दायरा बढ़ा सकती है, जिससे और ज्यादा किसानों को इस योजना का फायदा मिल सके. वहीं सूत्रों के अनुसार सरकार योजना में किसानों की दी जाने वाली रकम को 6 हजार रुपये से बढ़ा सकती है. वहीं महामारी के दौरान गरीबों को अनाज देने की योजना को भी आगे बढ़ाने का ऐलान हो सकता है. पीएम गरीब कल्याण योजना की समयसीमा मार्च 2022 को खत्म हो रही है. इसके साथ ही मनरेगा और फसल बीमा के फायदे में भी बढ़ोतरी का ऐलान किया जा सकता है. वित्त मंत्री पहली फरवरी को बजट पेश करने जा रही हैं. वहीं फरवरी मार्च में ही 5 राज्यों में चुनाव होने हैं.
मार्च 2022 तक बढ़ाई गई है मुफ्त अनाज की योजना
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल 24 नवंबर को राशन कार्डधारकों को राहत प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत मुफ्त खाद्यान्न आपूर्ति को मार्च, 2022 तक यानी चार महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया। .सरकार के इस फैसले से राजकोष पर 53,344 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. पीएमजीकेएवाई योजना के तहत मुफ्त खाद्यान्न वितरण करने की घोषणा पिछले साल मार्च में कोविड महामारी के दौरान गरीबों को राहत प्रदान करने के लिए की गई थी. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के तहत 2-3 रुपये प्रति किलो की बेहद सब्सिडी प्राप्त दर पर प्रदान किए जाने वाले सामान्य कोटे के ऊपर पीएमजीकेएवाई योजना के तहत यह मुफ्त खाद्यान्न वितरण होगा.
क्या है पीएम सम्मान निधि योजना
किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिये केंद्र सरकार पीएम सम्मान निधि योजना के तहत सीधे आर्थिक मदद देती है. इसके तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये मिलते हैं. सरकार हर 4 महीने में 2 हजार रुपये की किस्त जारी करती है. जो कि सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच जाती है. मीडिया में आई खबरों के अनुसार सरकार इस 6 हजार की रकम को बढ़ाकर आठ हजार रुपये कर सकती है.